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पानी के पार से दिखती मुंबई की ऊँची इमारतों की स्काईलाइन

मुंबई ट्रैवल गाइड

भारत के सबसे बड़े, सबसे व्यस्त और सबसे दरियादिल शहर की शानदार यात्रा की योजना के लिए जो कुछ चाहिए, सब कुछ।

मुंबई पहले अभिभूत करती है, फिर मोह लेती है। इसे दो-तीन दिन दीजिए, मोहल्ले के हिसाब से योजना बनाइए और बेझिझक खाइए — और यह एशिया के सबसे संतोष देने वाले शहरों में से एक बन जाती है। इस गाइड में ज़रूरी बातें हैं: थोड़ा इतिहास, कितने दिन रुकें, क्या देखें और क्या खाएँ, और वे व्यावहारिक ब्योरे जो फ़र्क़ पैदा करते हैं।

मुंबई एक नज़र में

तथ्यविवरण
स्थितिभारत का पश्चिमी तट, अरब सागर पर; महाराष्ट्र की राजधानी
आबादीमहानगर क्षेत्र में 2 करोड़ से ज़्यादा
हवाई अड्डाछत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (BOM), टर्मिनल 1 और 2
किसके लिए सबसे अच्छाशहरी ज़िंदगी, औपनिवेशिक और आर्ट डेको वास्तुकला, खाना, गुफा मंदिर, सिनेमा
भाषाएँमराठी (राजभाषा), हिंदी, गुजराती; अंग्रेज़ी ख़ूब बोली जाती है
मुद्राभारतीय रुपया (₹); UPI और कार्ड हर जगह चलते हैं
समय क्षेत्रभारतीय मानक समय (UTC+5:30)
विश्व धरोहर स्थलएलीफेंटा गुफाएँ; CSMT; विक्टोरियन गॉथिक और आर्ट डेको समूह

संक्षिप्त इतिहास

मुंबई की शुरुआत सात द्वीपों से हुई, जिन पर कोली मछुआरा समुदाय बसे थे; उन्हीं की देवी मुंबादेवी से शहर को अपना नाम मिला। पुर्तगालियों ने 1534 में ये द्वीप लिए और इन्हें बोम बहिया कहा; 1661 में ये कैथरीन ऑफ़ ब्रैगैंज़ा के चार्ल्स द्वितीय से विवाह के दहेज के हिस्से के रूप में इंग्लैंड को मिले, और राजशाही ने जल्द ही इन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी को पट्टे पर दे दिया। अगली दो सदियों में भराव करके इन द्वीपों को एक प्रायद्वीप में जोड़ दिया गया।

1860 के दशक की कपास की तेज़ी और 1869 में स्वेज़ नहर के खुलने ने बॉम्बे को भारत का प्रवेशद्वार बना दिया और फ़ोर्ट की गॉथिक इमारतों का ख़र्च उठाया। यह शहर आज़ादी के आंदोलन का केंद्र रहा — 1942 में भारत छोड़ो प्रस्ताव यहीं से शुरू हुआ — और आज़ादी के बाद 1960 में यह महाराष्ट्र की राजधानी बना। 1995 में इसका आधिकारिक नाम मुंबई कर दिया गया।

कितने दिन चाहिए?

  • एक दिन: कार से पूरे दिन का सिटी टूर — गेटवे, CSMT, मरीन ड्राइव, धोबी घाट और मणि भवन — और स्ट्रीट फ़ूड वाली एक शाम।
  • दो दिन: एलीफेंटा गुफाएँ और काला घोड़ा व ओवल मैदान की इत्मीनान भरी सैर जोड़िए।
  • तीन दिन: सबसे सही अवधि। बांद्रा, हाजी अली और धारावी टूर या बाज़ारों में से एक जोड़िए।
  • चार दिन या ज़्यादा: कान्हेरी गुफाएँ, बॉलीवुड टूर, या लोनावला, अलीबाग या माथेरान की डे-ट्रिप।

क्या देखें

दक्षिण से शुरू कीजिए: गेटवे ऑफ़ इंडिया, फ़ोर्ट और काला घोड़ा, CSMT और मरीन ड्राइव। नाव से एलीफेंटा जाइए। फिर उत्तर की ओर बढ़िए: बाज़ार, मालाबार हिल और मणि भवन, हाजी अली और धोबी घाट, धारावी और बांद्रा। ये वे जगहें हैं जिन्हें ज़्यादातर सैलानी सबसे पहले रखते हैं:

मुंबई के समुद्र-तट पर शाम की रोशनी में नहाया गेटवे ऑफ़ इंडिया का मेहराब दक्षिण मुंबई के मशहूर स्थल

गेटवे ऑफ़ इंडिया और कोलाबा

जहाँ से मुंबई की हर यात्रा शुरू होती है

बंदरगाह पर खड़ा बेसाल्ट का यह मेहराब मुंबई का मुख्य द्वार है: 1911 में एक शाही आगमन की याद में बनाया गया, 1924 में पूरा हुआ और आज शहर की सबसे पसंदीदा मिलने की जगह है। इसके बगल में ताज महल पैलेस होटल, एलीफेंटा की फ़ेरी और कोलाबा कॉज़वे के ठेले व कैफ़े हैं।

एलीफेंटा की मुख्य गुफा में विशाल त्रिमुखी सदाशिव की मूर्ति दक्षिण मुंबई के मशहूर स्थल

एलीफेंटा गुफाएँ

एक द्वीप पर चट्टान काटकर बना शिव मंदिर

गेटवे ऑफ़ इंडिया से फ़ेरी में एक घंटे की दूरी पर, एलीफेंटा द्वीप की एक पहाड़ी में भारतीय मूर्तिकला की एक उत्कृष्ट कृति छिपी है: लगभग 5वीं–6ठी शताब्दी में ठोस बेसाल्ट काटकर बनाया गया गुफा मंदिर, जिसके केंद्र में छह मीटर ऊँचे त्रिमुखी शिव हैं। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और सोमवार को बंद रहता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस का गुंबद और बुर्जियों वाला गॉथिक अग्रभाग दक्षिण मुंबई के मशहूर स्थल

CSMT (विक्टोरिया टर्मिनस)

एशिया का सबसे भव्य रेलवे स्टेशन

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस गिरजाघर के लिबास में एक चालू स्टेशन है: बुर्जियाँ, गार्गॉयल, रंगीन काँच और एक विशाल गुंबद, जिसे एफ़. डब्ल्यू. स्टीवंस ने डिज़ाइन किया और जो 1880 के दशक के आख़िर में पूरा हुआ। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और आज भी लाखों दैनिक यात्रियों को सँभालता है।

ओवल मैदान के पार से दिखता बॉम्बे हाई कोर्ट और राजाबाई क्लॉक टावर दक्षिण मुंबई के मशहूर स्थल

फ़ोर्ट, ओवल मैदान और काला घोड़ा

विक्टोरियन गॉथिक और आर्ट डेको आमने-सामने

ओवल मैदान की क्रिकेट पिचों के आर-पार, विक्टोरियन गॉथिक शैली की सार्वजनिक इमारतों की एक क़तार 1930 के दशक की आर्ट डेको अपार्टमेंट इमारतों की क़तार के सामने खड़ी है — दोनों मिलकर यूनेस्को विश्व धरोहर समूह बनाती हैं। इनके आसपास फ़ोर्ट का कारोबारी इलाका और काला घोड़ा है, जो शहर का गैलरी और संग्रहालय वाला मोहल्ला है।

मुंबई में तीन दिन: एक नमूना कार्यक्रम

  • पहला दिन — पुराना शहर। सुबह की ठंडक में गेटवे ऑफ़ इंडिया और कोलाबा कॉज़वे; दोपहर की गर्मी में CSMVS संग्रहालय और काला घोड़ा; देर दोपहर ओवल मैदान, फ़्लोरा फ़ाउंटेन और CSMT; मरीन ड्राइव पर सूर्यास्त और चौपाटी पर चाट।
  • दूसरा दिन — द्वीप और बाज़ार। एलीफेंटा की पहली फ़ेरी (सोमवार को नहीं); फ़ोर्ट में देर से दोपहर का खाना; क्रॉफ़र्ड मार्केट और बाज़ार; शाम को स्ट्रीट फ़ूड टूर।
  • तीसरा दिन — बीच का शहर और उत्तर। मणि भवन और बाणगंगा; हाजी अली और धोबी घाट, या सुबह का धारावी टूर; फिर क़िले, स्ट्रीट आर्ट, बैंडस्टैंड पर सूर्यास्त और रात के खाने के लिए बांद्रा।

क्या खाएँ

मुंबई का स्ट्रीट फ़ूड यहाँ आने की सबसे बड़ी वजह है। ज़रूरी चीज़ें:

  • वड़ा पाव — नरम पाव में मसालेदार आलू का वड़ा, सूखी लहसुन की चटनी और तली हुई हरी मिर्च के साथ। शहर का अपना बर्गर, हर नुक्कड़ पर मिलता है।
  • पाव भाजी — बड़े तवे पर पकी सब्ज़ियों और मसालों की मक्खनदार भाजी, सिके हुए पाव के साथ।
  • भेल पूरी, सेव पूरी और पानी पूरी — चाट का परिवार: मुरमुरे, कुरकुरी पूरियाँ, आलू, प्याज़, इमली और धनिये की चटनियाँ। चौपाटी और जुहू के समुद्र-तट इनके पारंपरिक ठिकाने हैं।
  • मिसल पाव और क़ीमा पाव — अंकुरित दालों की तीखी रसेदार मिसल, या मटन का क़ीमा, पाव के साथ: महाराष्ट्रीय और ईरानी कैफ़े वाले नाश्ते।
  • बॉम्बे सैंडविच — सिकी हुई सफ़ेद ब्रेड, हरी चटनी, आलू, चुकंदर, खीरा और चीज़।
  • सीफ़ूड — कुरकुरी तली बोंबिल (बॉम्बे डक), सुरमई (किंगफ़िश) फ़्राई और मालवणी या गोमांतक फ़िश थाली आज़माइए।
  • पारसी और ईरानी कैफ़े — फ़ोर्ट और बैलार्ड एस्टेट के सौ साल पुराने भोजन-कक्षों में मीठी दूधवाली चाय के साथ बन मस्का, बेरी पुलाव और धनसाक।
  • कबाब और रमज़ान का खाना — मोहम्मद अली रोड पर और कोलाबा में ताज के पीछे।
  • आख़िर में: कुल्फ़ी, फ़ालूदा, गन्ने का ताज़ा रस और “कटिंग चाय” — कड़क, मीठी चाय का आधा गिलास।
तली हुई हरी मिर्च के साथ परोसा गया वड़ा पाव — पाव में आलू का वड़ा
वड़ा पाव, मुंबई का सबसे पसंदीदा नाश्ता, अपनी तली हरी मिर्च के साथ।
स्ट्रीट फ़ूड की समझदारी: वे ठेले चुनिए जहाँ क़तार लगी हो, वही खाइए जो आपके सामने गरम-गरम पके, पहले एक-दो दिन कच्ची चटनियों और बर्फ़ से थोड़ा बचिए, और हैंड सैनिटाइज़र साथ रखिए। पहली शाम गाइड के साथ फ़ूड टूर आपको सिखा देता है कि बाक़ी यात्रा में क्या ऑर्डर करना है।

सिर्फ़ मुंबई में

डब्बावाले। हर कामकाजी दिन सफ़ेद टोपी पहने लगभग पाँच हज़ार लोग उपनगरों से घर का बना क़रीब 2,00,000 लोगों का दोपहर का खाना इकट्ठा करते हैं और ट्रेन, साइकिल और हाथगाड़ी से दफ़्तरों तक पहुँचाते हैं — हर डिब्बे पर बने रंगीन कोड की मदद से — और फिर ख़ाली डिब्बे वापस घर ले जाते हैं। यह व्यवस्था 130 साल से ज़्यादा पुरानी है और अपनी भरोसेमंदी के लिए मशहूर है। देखने की सबसे अच्छी जगह चर्चगेट स्टेशन के बाहर है, सोमवार से शनिवार, लगभग 11:30 से 12:30 के बीच।

अपनी साइकिलों के पास दोपहर के खाने के थैले छाँटते सफ़ेद टोपी वाले डब्बावाले
दिन भर के टिफ़िन छाँटते डब्बावाले।

बॉलीवुड। हिंदी फ़िल्म उद्योग उत्तरी उपनगरों में बसा है। आप यूँ ही किसी सेट पर नहीं जा सकते, पर बॉलीवुड टूर आपको गोरेगाँव की फ़िल्म सिटी के भीतर ले जाते हैं, और किसी पुराने सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघर — मसलन आर्ट डेको रीगल — में नई रिलीज़ देखना अपने आप में एक अनुभव है।

मैदानों पर क्रिकेट। हर सप्ताहांत ओवल, क्रॉस और आज़ाद मैदान पर दर्जनों मैच एक-दूसरे में घुले-मिले चलते हैं। मरीन ड्राइव के ठीक पीछे वानखेड़े स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय और IPL मैच होते हैं।

त्योहार

गणेश चतुर्थी (अगस्त या सितंबर) मुंबई का सबसे बड़ा त्योहार है: दस दिन तक मोहल्ले सजे हुए पंडालों में गणेश की ऊँची-ऊँची मूर्तियाँ स्थापित करते हैं, और आख़िरी दिन जुलूस उन्हें विसर्जन के लिए गिरगाँव चौपाटी और जुहू के समुद्र तक ले जाते हैं। यह अविस्मरणीय होता है, और भीड़ बेहद ज़्यादा। रमज़ान मोहम्मद अली रोड के रात के खाने के बाज़ार लाता है; नवरात्रि गरबा की नौ रातें; दिवाली मरीन ड्राइव को रोशन करती है; माउंट मैरी मेला सितंबर में बांद्रा को भर देता है; और काला घोड़ा आर्ट्स फ़ेस्टिवल आम तौर पर जनवरी के आख़िर या फ़रवरी में होता है। तारीख़ों के लिए कब जाएँ देखिए।

गणेश मूर्तियों के विसर्जन के दौरान गिरगाँव चौपाटी के समुद्र-तट पर उमड़ी विशाल भीड़
गणेश चतुर्थी के आख़िरी दिन गिरगाँव चौपाटी।

मुंबई से डे-ट्रिप

  • लोनावला, खंडाला, कार्ला और भाजा — हिल स्टेशन और प्राचीन बौद्ध गुफाएँ, दो-तीन घंटे की दूरी पर।
  • अलीबाग — समुद्र-तट, नारियल के बाग़ और कुलाबा का समुद्री क़िला, जहाँ भाटे के समय पैदल जाया जा सकता है। गेटवे से मांडवा की फ़ेरी लीजिए (लगभग एक घंटा, ज़्यादातर मानसून के बाहर) और फिर कनेक्टिंग बस, या अटल सेतु से घूमकर गाड़ी से जाइए।
  • माथेरान — लगभग 800 मीटर की ऊँचाई पर एक छोटा हिल स्टेशन, जहाँ मोटर वाहनों पर रोक है: लाल मिट्टी के रास्ते, घोड़े, हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे और नेरल से नैरो-गेज टॉय ट्रेन, जिसके कुछ हिस्से मानसून में बंद रहते हैं।
  • पुणे — मराठों की पुरानी राजधानी, एक्सप्रेसवे या ट्रेन से लगभग तीन घंटे दूर, शनिवार वाड़ा और आगा ख़ान पैलेस के लिए।
  • महाबलेश्वर — महाराष्ट्र का सबसे मशहूर हिल स्टेशन, लगभग 250–280 किमी दूर और सड़क से पाँच-छह घंटे, इसलिए कम से कम एक रात रुकने की योजना बनाइए। हमारी महाबलेश्वर ट्रैवल गाइड में व्यूपॉइंट, वेण्णा झील, स्ट्रॉबेरी का मौसम और मुंबई से पहुँचने के रास्ते शामिल हैं।
  • अजंता और एलोरा — व्यवहार में डे-ट्रिप नहीं, पर औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) होकर दो-तीन दिन का सबसे अच्छा विस्तार।

पैसा, फ़ोन और काम की बातें

  • पैसा: एटीएम हर जगह हैं। टैक्सी और ठेलों के लिए छुट्टे नोट रखिए।
  • टिप: रेस्तराँ में सर्विस शामिल न हो तो लगभग 10%; टैक्सी का किराया राउंड-अप कर दीजिए; गाइड और ड्राइवर को अपनी मर्ज़ी से टिप दीजिए।
  • सिम और डेटा: एयरपोर्ट के काउंटर पासपोर्ट पर टूरिस्ट सिम बेचते हैं; eSIM ज़्यादा आसान है। कवरेज बेहतरीन है।
  • बिजली: 230 V; सॉकेट में गोल पिन वाले प्लग लगते हैं (टाइप C, D और M)।
  • वीज़ा: ज़्यादातर देशों के नागरिकों को पहले से वीज़ा या ई-वीज़ा लेना होता है — आवेदन सिर्फ़ भारत सरकार की आधिकारिक साइट से कीजिए।
  • पानी: बोतलबंद या फ़िल्टर किया हुआ पानी पीजिए।

सुरक्षा और शिष्टाचार

  • ट्रैफ़िक सबसे बड़ा ख़तरा है। भीड़ के साथ सड़क पार कीजिए और सबवे व फ़ुटब्रिज इस्तेमाल कीजिए।
  • ट्रेन: भीड़ के समय से बचिए और बैग अपने आगे रखिए। आना-जाना देखिए।
  • महिला यात्री: मुंबई को व्यापक रूप से भारत के उन बड़े शहरों में गिना जाता है जो महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत सहज हैं। ट्रेनों में महिला डिब्बे और देर रात ऐप टैक्सी इस्तेमाल कीजिए।
  • दलाल: गेटवे और क्रॉफ़र्ड मार्केट पर बिन बुलाए “गाइडों” को, और फ़िल्म में एक्स्ट्रा बनने का न्योता देने वाले हर किसी को नज़रअंदाज़ कीजिए — जब तक वह किसी भरोसेमंद ज़रिये से न आए।
  • धार्मिक स्थल: कंधे और घुटने ढकिए, जूते उतारिए और लोगों की तस्वीर लेने से पहले पूछिए।
  • समुद्र: शहर के समुद्र-तट टहलने और खाने के लिए हैं, तैरने के लिए नहीं। मानसून में ज्वार के समय समुद्री दीवार से दूर रहिए।
  • शराब: बार और रेस्तराँ में आसानी से मिलती है; साल में कुछ ड्राई डे होते हैं, और महाराष्ट्र में शराब पीने की क़ानूनी उम्र कई देशों से ज़्यादा है — पहचान-पत्र साथ रखिए।

क्या पैक करें

  • हल्के सूती या लिनन के कपड़े, और धर्मस्थलों व ज़रूरत से ज़्यादा ठंडे एयर-कंडीशंड रेस्तराँ के लिए स्कार्फ़ या शॉल।
  • ऊबड़-खाबड़ फ़ुटपाथों के लिए आरामदेह बंद जूते; मंदिरों के लिए आसानी से उतरने वाली सैंडल।
  • अक्टूबर से मई तक सनस्क्रीन, धूप का चश्मा और टोपी।
  • मानसून में: मज़बूत छाता, जल्दी सूखने वाले कपड़े, वॉटरप्रूफ़ सैंडल और फ़ोन के लिए ड्राई बैग।
  • हैंड सैनिटाइज़र, टिश्यू और आपकी नियमित दवाएँ।
  • पावर बैंक — आप दिन भर मैप और राइड ऐप इस्तेमाल करेंगे।
मुंबई के अपने दिन प्लान करें

मुंबई उसके साथ देखिए जो इसे जानता है

गेटवे, एलीफेंटा की गुफाएँ, बाज़ार, लोकल ट्रेन और सही ठेले पर पाव भाजी की प्लेट — एक अच्छा गाइड इस बड़े, शोर भरे शहर को आसान बना देता है। टूर की तुलना कीजिए और कुछ ही क्लिक में बुक कीजिए।

काम की बातें

मुंबई यात्रा: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मुंबई घूमने लायक़ है?

हाँ। यहाँ दिल्ली या राजस्थान से कम प्राचीन स्मारक हैं, पर आधुनिक भारत इतनी जीवंतता से और कहीं नहीं दिखता — और यहाँ का खाना, वास्तुकला और समुद्र-तट लाजवाब हैं।

क्या स्ट्रीट फ़ूड खाना सुरक्षित है?

ज़्यादातर, अगर आप भीड़ वाले ऐसे ठेले चुनें जहाँ खाना आपके सामने ताज़ा और गरम पकता है, और शुरुआत में कच्ची चटनियों और बर्फ़ से बचें। गाइड के साथ स्ट्रीट फ़ूड टूर सबसे आसान शुरुआत है। बोतलबंद या फ़िल्टर किया हुआ पानी पीजिए।

मुंबई कहें या बॉम्बे?

1995 से आधिकारिक नाम मुंबई है। कई निवासी बातचीत में अब भी बॉम्बे कहते हैं, और दोनों नाम हर जगह समझे जाते हैं।

क्या मुझे नक़द की ज़रूरत है?

टैक्सी, स्ट्रीट फ़ूड और छोटी दुकानों के लिए कुछ नक़द रखिए। होटलों, रेस्तराँ और मॉल में कार्ड चलते हैं, और निवासियों के लिए UPI मोबाइल भुगतान हर जगह है; सैलानी कभी-कभी इसे ख़ास प्रीपेड वॉलेट के ज़रिये इस्तेमाल कर सकते हैं — मौजूदा विकल्प जाँच लीजिए।

क्या पहनना चाहिए?

हल्के, ढीले सूती कपड़े। भारतीय पैमाने पर मुंबई खुले मिज़ाज की है, पर मंदिरों, मस्जिदों और बाज़ारों के लिए कंधे और घुटने ढकिए, और स्कार्फ़ साथ रखिए।